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आधुनिक भारत के स्वपनद्रष्टा श्री राजीव गाँधी पर निबंध | RBSE Class 9th to 12th Easy Competition 2021

Essay On The Dreamer of Modern India Rajeev Gandhi in Hindi

                      आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा श्री राजीव गांधी


 संकेत बिन्दु 


  • प्रस्तावना
  • जीवन परिचय 
  • राजीव गाँधी के महत्वपूर्ण कार्य 
  • दूरसंचार क्रांति का आगाज 
  • युवाओं को वोट देने का अधिकार 
  • कंप्यूटर क्षेत्र में क्रांति 
  • पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत किया
  • जवाहर नवोदय विद्यालयों की शुरुवात  
  • उपसंहार 

RBSE Class 9th to 12th Easy Competition 2021

प्रस्तावना


“भारत एक प्राचीन देश लेकिन एक युवा राष्ट्र है। मैं जवान हूं और मेरा भी एक सपना है। मेरा सपना है भारत को मजबूत , स्वतंत्र , आत्मनिर्भर और दुनिया के सभी देशों में प्रथम रैंक में लाना और मानव जाति की सेवा करना” -राजीव गाँधी  

राजीव गाँधी भारत को एक मजबूत सैन्य शक्ति वाला विकसित , ताकतवर व संचार उपकरणों से लैस आधुनिक भारत बनाने का सपना अपने दिल में पाले थे। और उन्होंने अपने इस सपने को साकार करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम भी उठाये। जो आगे चलकर 21वीं सदी के आधुनिक भारत की नींव बने। राजीव गाँधी वाकई में “आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा थे”।


जीवन परिचय 

20 अगस्त 1944 को मुंबई में जन्मे राजीव गांधी उस समय महज 3 वर्ष के थे जब देश आजाद हुआ और उनके नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। इंदिरा गांधी व फिरोज गाँधी के बड़े पुत्र राजीव गांधी बहुत ही मधुरभाषी , बहुमुखी प्रतिभा के धनी व शानदार व्यक्तित्व के मालिक थे। 


हवाई जहाज उड़ाने के शौक़ीन राजीव गांधी महज 40 वर्ष की उम्र में भारत के प्रधानमन्त्री बने। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सन 1984 से लेकर 1991 के बीच वो देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री रहे।

हालाँकि आधुनिक भारत का वह स्वप्नदृष्टा व उभरता हुआ राजनेता आतंकवाद की भेंट चढ़ असमय ही हमसे दूर चला गया। मगर अपने पांच साल के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने कई अहम फैसले लिए। जिन्होंने देश की जनता के दिलों दिमाग में एक अमिट छाप छोड़ी।

राजीव गाँधी द्वारा लिये गये फैसलों ने 21वीं सदी के आधुनिक भारत की नींव रखने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । इसीलिए उन्हें “21वीं सदी के भारत का निर्माता या आधुनिक भारत का स्वप्नदृष्टा” भी कहा जाता है।


राजीव गाँधी के महत्वपूर्ण कार्य 

विकसित , ताकतवर व संचार उपकरणों से लैस आधुनिक भारत के अपने सपने को साकार करने के लिए उन्होंने अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में कई सारे अहम कदम उठाये। 


आज भारत को “डिजिटल इंडिया (Digital India)” बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन भारत को “डिजिटल इंडिया” बनाने का सपना राजीव गांधी बहुत पहले ही देख चुके थे। राजीव गांधी की पहल पर ही अगस्त 1984 में “भारतीय दूरसंचार नेटवर्क” की स्थापना के लिए “सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) की स्थापना की गई।


इसीे के तहत शहरों से लेकर गांवों तक दूरसंचार सेवाओं का जाल बिछना शुरू हुआ। जगह-जगह पर पीसीओ (PCO) खुले जिससे देश के शहरी व ग्रामीण इलाकों में संचार सेवा का बहुत तेजी से विस्तार हुआ। और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी विकसित हुए। 

 

1986 में राजीव गांधी के प्रयासों से ही “महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)”  की स्थापना हुई। जिससे दूरसंचार क्षेत्र के कार्यों में और भी तेजी आयी।


 राजीव गांधी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को टेलीफोन सेवा के माध्यम से आपस में जोड़ना चाहते थे और देश में कंप्यूटर क्रांति लाकर सरकारी कामकाज की गति में तेजी लाना चाहते थे । राजीव गांधी चाहते थे कि हमारे देश के गांव-गांव तक टेलीफोन सेवा पहुंचे और सारा काम कंप्यूटर के माध्यम से हो।


वे कंप्यूटर शिक्षा के प्रचार प्रसार को बहुत अधिक महत्व देते थे।  इसीलिए उन्हें “डिजिटल इंडिया का आर्किटेक्ट और सूचना तकनीकी व दूरसंचार क्रांति का जनक” भी कहा जाता है।


2.  युवाओं को वोट देने का अधिकार 


युवाओं को अपने जनप्रतिनिधियों को चुनने तथा देश के प्रति उन्हें जिम्मेदार व सशक्त बनाने के लिए राजीव गांधी ने युवाओं की वोट देने की उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी। 1989 में संविधान के 61वें संशोधन के जरिए वोट देने की उम्र सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष किया जिसका युवाओं ने जोरदार स्वागत किया। 


3. कंप्यूटर क्षेत्र में क्रांति 


राजीव गांधी का मानना था कि विज्ञान और तकनीकी की मदद के बिना उद्योग धंधों का विकास नहीं हो सकता और भारत तरक्की की राह पर भी नहीं चल सकता। भारत के चौहमुखी विकास के लिए विज्ञान और तकनीकी का मेल आवश्यक हैं।


हालाँकि जिस समय राजीव गांधी यह सपना देख रहे थे उस समय कंप्यूटर आम लोगों की पहुंच से बहुत दूर थे। आम लोगों की पहुंच में कंप्यूटर हो , इसके लिए उन्होंने सबसे पहले कंप्यूटर उपकरणों में आयात शुल्क घटाया जिससे कंप्यूटर की कीमतों में काफी फर्क आया। 

 

भारतीय रेलवे में टिकट जारी होने की कंप्यूटरीकृत व्यवस्था इसी कंप्यूटर क्रांति का परिणाम हैं। राजीव गांधी को भारत में “कंप्यूटर क्रांति” लाने का श्रेय भी दिया जाता है उन्होंने न सिर्फ कंप्यूटर को भारत के हर घर तक पहुंचाने का काम किया बल्कि भारत में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने में भी अहम रोल निभाया। 


हालांकि 1970 में देश के पब्लिक सेक्टर में कंप्यूटर डिवीजन शुरू करने के लिए “डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स” की शुरुआत हो गई थी। सन 1978 तक IBM  ही देश की पहली कंपनी थी जो कंप्यूटर के क्षेत्र में कार्य कर रही थी। 

4 . पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत किया 

“पावर टू द पीपल (Power To The People) ” के पक्षधर राजीव गांधी का मानना था कि “जब तक पंचायती राज व्यवस्था सशक्त एवं सबल नहीं होगी , तब तक निचले स्तर तक लोकतंत्र नहीं पहुंच सकता”। युवाओं को सशक्त बनाने के साथ ही सत्ता का विकेंद्रीकरण भी राजीव गांधी ने करना शुरू किया।  जिसका परिणाम पंचायत राज व्यवस्था के रूप में सामने आया। 


उन्होंने पंचायती राज के जरिए गांवों को खुद अपना विकास करने का अधिकार दिया और उसमें  महिलाओं की एक तिहाई हिस्सेदारी भी सुनिश्चित की । 

उन्होंने अपने कार्यकाल में पंचायती राज व्यवस्था का पूरा प्रस्ताव तैयार कराया लेकिन हत्या हो जाने के कारण वह अपने इस सपने को साकार होते नहीं देख पाए।


लेकिन उनकी मृत्यु के बाद आये नरसिम्हा राव सरकार ने 1992 में 73वें और 74 वें संविधान संशोधन के जरिये पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना की।  24 अप्रैल 1993 को पूरे देश में पंचायती राज व्यवस्था शुरू हुई जिसके बाद सभी राज्यों में पंचायती चुनावों की शुरुवात हुई।


5. जवाहर नवोदय विद्यालयों की शुरुवात 


राजीव गांधी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी अग्रणी कार्य किए। जिनमें प्रमुख हैं जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना। गांव के बच्चों को अच्छी व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। इसी उद्देश्य से राजीव गांधी ने जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना की।


ये सभी विद्यालय आवासीय होते हैं।  प्रवेश परीक्षा में सफल होने वाले बच्चों को इन स्कूलों में कक्षा 6 से कक्षा 12 तक की मुफ्त शिक्षा व हॉस्टल में रहने -खाने की सुविधा प्रदान की जाती है।

 

राजीव गांधी ने शिक्षा क्षेत्र में भी कुछ साहसिक कदम उठाये । उनकी सरकार ने 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की घोषणा की जिसके तहत पूरे देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण और विस्तार हुआ। 

6. चीन की यात्रा रही शानदार 


सन 1954 के बाद राजीव गांधी ने दिसंबर 1988 में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए चीन की यात्रा की। उनके इस कदम से भारत – चीन के संबंध सामान्य होने में काफी मदद मिली। सीमा विवाद न हो और दोनों देशों के बीच शांति रहे। इस उद्देश्य से उन्होंने चीन के साथ मिलकर एक “ज्वाइंट वर्किंग कमेटी” बनाई गई । 

अन्य कार्य

राजीव गांधी का मानना था कि युवा शक्ति में कुछ भी कर गुजरने का सामर्थ्य होता है। इसीलिए वो हर क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी के पक्षधर थे। वो चाहते थे कि देश के हर युवा को काम मिले। इसीलिए “जवाहर रोजगार योजना” की शुरुआत कर उन्होंने युवाओं को रोजगार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। 

राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में कई साहसिक कदम भी उठाए जिसमें श्रीलंका में शांति सेना का भेजा जाना , असम समझौता , पंजाब समझौता व मिजोरम समझौता आदि शामिल थे 

उन्होंने अपने कार्यकाल में भारत की सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए देश के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों की रफ्तार को बढ़ाने का फैसला भी किया। 

उपसहार

 राजीव गांधी , विश्व की सबसे अत्याधुनिक तकनीकी से लैस करके , भारत को ताकतवर विकसित देशों की श्रेणी में जल्द से जल्द खड़ा करना चाहते थे। वो अक्सर कहा करते थे कि “भारत की एकता और अखंडता” को बनाए रखते हुए उनका सबसे बड़ा सपना “21वीं सदी के आधुनिक विकसित भारत” का निर्माण करने का है। 


राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में जो महत्वपूर्ण फैसले लिए उनका असर आज देश में स्पष्ट दिख रहा है। भारत “डिजिटल इंडिया” की तरफ अपने मजबूत कदम बढ़ा चुका हैं। गाँव – गाँव तक इंटरनेट सुबिधा पहुंच चुकी हैं।

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