WWW.BRDSTUDY.ONLINE

Post Top Ad

>

RBSE 10th Class Social Science Notes अध्याय 4 विश्व का इतिहास

 अध्याय 4 विश्व का इतिहास

यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय:- स्वतंत्रता की इच्छा और राष्ट्र बनने की सशक्त अभिव्यक्ति अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम में देखी जा सकती है यूरोप की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति  भी इसी में फ्रांसीसी क्रांति के साथ शुरुआत हुई इस क्रांति ने ही राष्ट्रवाद को यूरोप में प्रसारित करने की मुख्य भूमिका निभाई। यूरोप विभिन्न राज्य सचिव तथा कैटेनों तथा छोटी-छोटी राजनीतिक इकाइयों में विभक्त था।

यूरोप में राष्ट्रवाद के कारण

1. मध्यम वर्ग का उदय:- यूरोप में सामाजिक और राजनीतिक रूप से जमीन का मालिक कुलीन वर्ग सबसे प्रभावशाली वर्ग था यह वर्ग जनसंख्या के लिए हाथ से एक छोटा समूह था जबकि यूरोप के अधिकांश जनसंख्या कृषक थी। पश्चिमी और मध्य यूरोप में औद्योगिक उत्पादन और व्यापार में वृद्धि से शहरों का विकास तथा वाणिज्य वर्गों के उदय में एक नया सामाजिक समूह अस्तित्व में आया जिसमें श्रमिक वर्ग के लोग मध्यम वर्ग जो उद्योगपतियों व्यापारियों तथा सेवा क्षेत्र के लोगों से बना था।

2. उदारवादी राष्ट्रवाद:- यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना का पोषण उदारवाद एवं प्रजातंत्र में किया सामान्यता उदारवाद का अर्थ मर्यादित स्वतंत्रता और समानता से है उदारवाद का लक्ष्य अधिकांश क्षेत्रों को नियंत्रण से मुक्त करना था उदारवादी व्यक्ति स्वतंत्रता जैसी भाषण लेखन सभा संगठन तथा निजी संपत्ति के सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहते थे।

3. इंग्लैंड तथा फ्रांस की क्रांति:- इंग्लैंड की शानदार गौरवपूर्ण क्रांति ने इस मान्यता को जन्म दिया कि किसी भी प्रकार से शासन तंत्र में दे दिए अधिकार का कोई औचित्य नहीं है इसी क्रम में फ्रांस की क्रांति में धारणा को जन्म दिया कि व्यक्ति की स्वतंत्रता इतनी पावन है कि कोई भी सता इस की अवहेलना नहीं कर सकती है।

4. क्रांतिकारी:- 1815 ईसवी के बाद वर्षों में दमन और वैसे अनेक उदारवादी राष्ट्रवादी भूमिगत हो गए बहुत सारे यूरोपीय राज्यों में क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण देने और विचारों का प्रसार करने के लिए गुप्त संगठन बनाए गए क्रांतिकारी होने का मतलब उन प्रजातंत्र की व्यवस्थाओं का विरोध करने से था जो वियना कांग्रेस के बाद स्थापित हो गई थी साथी स्वतंत्रता और मुक्ति के लिए प्रतिबंध होना और संघर्ष करना क्रांतिकारी होने के लिए जरूरी था।

औद्योगिक क्रांति का अर्थ:- औद्योगिक क्रांति का तात्पर्य उत्पादन प्रणाली में हुए आधारभूत परिवर्तनों से है जिसके फलस्वरूप जन संसाधनों को अपने परंपरागत कृषि व्यवसाय एवं घरेलू उद्योग धंधों को छोड़कर नहीं प्रकार के व्रत उद्योगों में काम करने का तथा यातायात के नवीन साधनों का प्रयोग करने का अवसर मिलना है यही उद्योग क्रांति का अर्थ है।

सम्पूर्ण नोट्स 👇👇


No comments:

Post a comment

close