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Rajasthan Board Science Notes Class 10th Chapter- 5

                        पाठ - 5   दैनिक जीवन में रसायन 


अम्ल, क्षार एवं लवण : 
अम्ल:-
  • अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं।
  • अम्ल को अंग्रेजी में एसिड़ कहते है।,
  • जो कि लैटिन भाषा के शब्द एसिइस = खट्टा से बना है। अध्ह्याय

अम्लों के गुण:
(i)अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं।
(ii) अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते है।
(ii) अम्ल जलीय विलयन में हाइड्रोजन भाधन [H' देते हैं। 

जैसे: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल [HCL], नाइट्रिक अम्ल [HNO3]., सल्फ्यूरिक अम्ल ,ऐसीटिक अम्ल [CH3 CooH], फार्मिक अम्ल [HCooH] आदि कई अम्लों का हमारे भोजन के रूप में भी उपयोग किया जाता है। जैसे- नींब , संन्तरा, टमाटर, दही, कच्चे आम , आचारों में सिरका आदि

क्षार :-
  • यह स्वाद में कड़वा होता है।
  • और यह स्पर्श करने साबुन जैसा होता है। 

क्षार के गुण :
(i) क्षार स्वाद में कड़वा होता है।
(ii) क्षार लाल लिटमस पत्र को नीला फर देते है।
(iii) क्षार जलीय विलयन में हाइड्रोक्सील भायन (OH) देते है। जैसे :- सोडियम हाइड्रॉक्साइड [NaOH],लाइटिक अम्स) 
पोटेशियम हाइड्रॉक्साइ [ ROH], एलुमिनियम हाइड्रोक्साइड अमोनियम हाइड्रॉक्साइड [ NHOH] 

Note:- अम्ल तया क्षार दोनों जल में विलेय होते है। यदि इनमें जल की मात्रा अधिक होती है। 

तो ये तनु कहलाते है। और यदि जल की तुलना में अमल या क्षार की मात्रा अधिक होती है। तो ये सांन्द्र कहलाते हैं।

लवण : अम्ल और क्षार की क्रिया द्वारा लवन और जल बनते है 
अम्ल + क्षार → लवण + जल  
यह अभिक्रिया उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है। तथा उष्माक्षेपी अभिक्रिया होती है। → प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार से बने लवण उदासिन होते हैं। जैसे : Nacl , koh, Naoh ,


क्रिस्टलन जल : लवण के इकाई सुत्र में उपस्थित जल के अणुओं की संख्या की क्रिस्टलन का जल कहते है। Example:- Na2co3.10H20 [ धावन सोड़ा ],

अम्ल व क्षार की आरेनियस संकल्पना : 
अम्ल; आरेनियस के अनुसार " जो प्रदार्थ जलीय विलयन में अपघटित
होकर हाइड्रोजन आयन (H) देते हैं। अम्ल कहलाते हैं। जैसे : नाइट्रिक अम्ल ये सभी अम्ल है क्योकी जलीय विलयन में +आयन देते है।

प्रबल अम्ल;- वे अम्ल जी जलीय विलयन में पूर्णतया आयनित हो जाते है। 
प्रबल अम्ल कहलाते है। जैसे - Hcl, H2SO4, HNO3 आदि 

दुर्बल अम्ल : वे अम्ल जो जलीय विलयन में पूर्ण रन्प से आयनित नहीं होते हैं। दुर्बल अम्ल कहलाते है। 
जैसे :- CHF COOH, H2Co3 आदि

क्षार :- आरेनियस के अनुसार : वे पदार्थ जी जलीय विलयन मेंअपघटित होकर हाइड्रॉक्सील (OH) आयन देते है। क्षार कहलाते है। 


संयुग्मी अम्ल 
वे सभी क्षार है। क्योंकी जलीय विलयन में H हाइड्रोक्सील आयन देते है।
प्रबल क्षार:- वे क्षार जिनका जलीय विलयन में पूर्णतः आघनन हो जाता है।, प्रबल क्षार कहलाते हैं। 

दुर्बल क्षार :- वे क्षार जो जलीय विलयन में पूर्णत आयनित्त नहीं होते है।, दुर्बल क्षार कहलाते हैं। 

अम्ल व क्षार की ब्रांस्टेड - लोरी संकल्पना : 

ब्रांस्टेड-लोरी के अनुसार " वे पदार्थ जो प्रोटॉन CH) दाता होते हैं। अम्ल" कहलाते हैं। तथा प्रोटॉन (H+) को ग्रहण करने वाला प्रदार्थ
"क्षार" कहलाता है। इन्होने इसे समझाने के लिए संयुग्मी अम्ल एंव संयुग्मी क्षार की अवधारण दी 

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